过去一段时间,委内瑞拉的经济和政治危机不仅引起全球瞩目,也让世界一分为二,两大阵营日渐明显。
反对派瓜伊多宣布出任过渡总统之后,50多个国家步美国后尘,明确表态力挺。
但是,委内瑞拉总统马杜罗也有自己的朋友圈,其中包括一些距离遥远、和委内瑞拉没有任何历史、商业关系的国家。
为什么委内瑞拉会让世界瞩目?各国选边站队背后都有哪些考量?
中国对委内瑞拉的主要担心好像是一个11位数。据信,中国曾经借给委内瑞拉政府超过500亿美元。事实上,一些分析师估算,中国在委内瑞拉的投资已经超过670亿美元。
在很多人怀疑委内瑞拉偿还外债能力的时候,中国出手、成为马杜罗政府的最大债主。但是,如果委内瑞拉违约,中国也可能损失最大。
不过,据信委内瑞拉已经偿还欠中国债务当中的一大部分。
经济咨询、预测及分析公司“牛津经济研究院”(Oxford Economics)的拉美事务专家卡洛斯·德苏萨(Carlos de Sousa)告诉BBC,委内瑞拉仍然欠中国投资方至少160亿美元。
他说,中国决定投资的出发点是战略考虑。“委内瑞拉是已证实的世界上原油储量最大的国家,中国向委内瑞拉投资、获得原油供应保障的考量的确有道理,石油是中国经济发展所必需的。”
但是,也有人对中国贷款贷颇感不安。
拉斯·达伦(Russ Dallen)是“加拉加斯资本市场”投资银行的合伙人,上星期他对美国CNBC电视台表示,中国人担心委内瑞拉反对派可能拒绝承认前总统查维斯时代欠下的外债,或者去寻找不偿还的“法律漏洞”。
瓜伊多一直在试图打消外界的顾虑。二月初,他在接受《南华早报》采访时表示,委内瑞拉政府将严格遵守法律和国际义务,尊重“与中国签订的所有协议”。
委内瑞拉危机爆发以来,中国政府表示支持马杜罗,但是北京官方也表示,他们与各方保持“密切沟通”。有观察人士认为,这表明,中国主要的担心是经济、而不是政治。
委内瑞拉局势也是俄国媒体中的重头戏,俄国人密切关注委内瑞拉动态。总统普京公开表示力挺马杜罗。
德苏萨认为,从地缘政治意义来看,委内瑞拉对俄国相当重要。俄国感觉自己传统的朋友圈受到威胁,保持和委内瑞拉的关系有可能抗衡美国的影响。
德苏萨还说,“在乌克兰问题上和美国的冲撞让俄国很恼火,普京在委内瑞拉问题上采取同样的手法,回报美国。”
“俄国要对美国喊话:现在轮到我来烦你、干扰你在你家‘后院’利益的时候了。”
但是在俄国,委内瑞拉局势也引发了一场有关内政和外交的辩论。
BBC俄语主编法米尔·伊斯梅尔洛夫(Famil Ismailov)说,“通常情况下,俄国人已经厌倦了帮助外国政府,比如叙利亚和委内瑞拉,而不是把钱投入国内。但是,俄国政府有非常强大的内部宣传机器。
BBC国际媒体观察部发现,俄国官方媒体高调报道委内瑞拉支持马杜罗的示威游行,质疑反对派收获的支持。
德苏萨说,俄国的经济利益非常明显,“莫斯科已经以贷款、直接投资等方式投入了大约100亿美元。”
有分析人士估计,这一数字可能高达170亿美元。德苏萨说,俄国认为,委内瑞拉原油产出下跌、经济衰退,这是“抄底”的好机会。
伊斯梅尔洛夫认为,收回委内瑞拉贷款的希望不大。他说,“俄国对一个国家投资,动机是政治,而不是经济。给了委内瑞拉的钱拿不回来了,但是,这等于付钱给委内瑞拉、收获对俄国的支持。”
他还说,“对俄国政府来说,俄国面临制裁,但仍能继续担当超级大国的角色、和友邦保持关系,对俄国来说,这很重要,这笔钱花的值。”
但是,德苏萨认为,俄国有可能收回对马杜罗政府投资的一半。他说,委内瑞拉国家石油公司PDVSA从俄国国家石油公司Rosneft获得60亿美元贷款,委方已经偿还一半,“另一半可能永远也拿不回来了。”
“但是依我看,Rosneft并没有损失掉在委内瑞拉南部油田的直接投资,因为委内瑞拉反对派已经表示,他们今后仍会与中国、俄国做生意。”
Thursday, February 28, 2019
Friday, February 8, 2019
राहुल ने कहा- राफेल में घोटाले के नए सबूत; रक्षा मंत्री बोलीं- यह मुर्दे में जान डालने की कोशिश
राफेल डील को लेकर 38 महीने पुराना रक्षा मंत्रालय का एक नोट शुक्रवार को सामने आया। इस नोट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2015 में कहा था कि राफेल डील पर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से समानांतर बातचीत की जा रही है। मंत्रालय को इस पर आपत्ति थी। इस मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ये नए सबूत बताते हैं कि मोदी घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने वायुसेना के 30 हजार करोड़ रुपए लूटकर अनिल अंबानी को दिए हैं।’’ हालांकि, मौजूदा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने राहुल के दावों को खारिज कर दिया।
नोट में कहा गया- प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति कमजोर की
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट और न्यूज एजेंसी एएनआई की तरफ से जारी डिफेंस नोट के मुताबिक, राफेल डील पर रक्षा मंत्रालय ने 24 नवंबर 2015 को एक पत्र लिखकर पीएमओ के दखल पर ऐतराज जताया था। नोट में कहा गया था कि यह साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की समानांतर बातचीत से भारत और भारत के वार्ताकार दल की स्थिति कमजोर हुई है। पीएमओ के अफसरों ने फ्रांस के साथ बातचीत में जो कहा है, वह रक्षा मंत्रालय के रुख से एकदम विपरीत है।
रक्षा सचिव ने रक्षा मंत्री से अपील की थी
इसी पर नोट पर तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए एक संदेश लिखा था। इसमें कहा गया था, ''रक्षा मंत्री कृपया इस मामले को देखें। हमारी पीएमओ को सलाह है कि उनके जो अधिकारी फ्रांस से वार्ता दल में शामिल नहीं हैं, उन्हें फ्रांस सरकार के अधिकारियों से समानांतर चर्चा नहीं करनी चाहिए। अगर पीएमओ मंत्रालय की बातचीत से सहमत नहीं है तो हम इसमें बदलाव कर सकते हैं। पीएमओ की समानांतर वार्ता से सौदे में मंत्रालय और भारतीय दल की स्थिति कमजोर होगी।''
पर्रिकर ने इसे ओवर रिएक्शन बताया था
तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा सचिव के नोट पर लिखा था- ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमओ और फ्रांस का राष्ट्रपति कार्यालय शिखर वार्ता के फैसलों के अमल पर नजर रख रहा है। रक्षा सचिव इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के साथ चर्चा कर सुलझा सकते हैं। अफसरों की आपत्ति ओवर रिएक्शन है।
फ्रांसीसी वार्ता दल के प्रमुख ने पीएमओ से फोन आने पर पत्र लिखा था
मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रक्षा मंत्रालय को पीएमओ के दखल की जानकारी फ्रांस के वार्ता दल के प्रमुख जनरल स्टीफन रेब के एक पत्र से मिली। इसमें पीएमओ के ज्वाइंट सेक्रेटरी और फ्रांस के रक्षा मंत्री के सलाहकार के बीच 20 नवंबर 2015 को फोन पर हुई बातचीत का जिक्र था।
इसके बाद रक्षा मंत्रालय और भारतीय वार्ता दल के प्रमुख एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा (एयरफोर्स के डिप्टी चीफ) की ओर से पीएमओ को पत्र लिखकर समानांतर वार्ता की जानकारी दी गई थी।
जवाब में पीएमओ के सेक्रेटरी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के कहने पर वहां के रक्षा मंत्री के सलाहकार ने उसने चर्चा की। हालांकि, सरकार ने 18 अक्टूबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल सौदे में बातचीत करने के लिए दल सात सदस्य थे। एयरफोर्स के डिप्टी चीफ इसके प्रमुख थे। इसमें पीएमओ की किसी तरह की भूमिका नहीं थी।
राहुल ने सैनिकों से कहा- प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर देखें
राहुल ने पहले ट्वीट किया, ''देश के वीर सैनिक, आप हमारे रक्षक हो। आप देश के लिए अपनी जान तक देने को हमेशा तैयार रहते हो। आप गर्व हो हमारे। मेरी प्रेस वार्ता जरूर देखें।'' प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि राफेल घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। अब सब कुछ साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल थे। वे घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने ही अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए।
राहुल ने कहा- क्या मोदी को स्किजोफ्रेनिया है?
राहुल ने कहा- फ्रांस के राष्ट्रपति ने मोदी को चोर क्यों कहा था। और आज के नोट से यह साफ हो गया है कि रक्षा मंत्रालय उनको चोर बुला रहा है। वे चोर भी हैं। एक बार मुझे देखें और एक बार प्रधानमंत्री को देखें। आपको समझ आ जाएगा कि कौन घबराया हुआ है। वे कह रहे हैं कि उल्टा चोर चौकीदार को डांटें। क्या वे दोहरे व्यक्तित्व के शिकार हैं। क्या वे खुद को चोर और चौकीदार, दोनों मानते हैं। समझ में नहीं आता है कि कभी चौकीदार बन जाते हैं, कभी चोर। क्या उन्हें स्किजोफ्रेनिया है? पर्रिकर से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि उनसे डील को लेकर कोई बात नहीं हुई। यह सिर्फ सौजन्य भेंट थी।
नोट में कहा गया- प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति कमजोर की
अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट और न्यूज एजेंसी एएनआई की तरफ से जारी डिफेंस नोट के मुताबिक, राफेल डील पर रक्षा मंत्रालय ने 24 नवंबर 2015 को एक पत्र लिखकर पीएमओ के दखल पर ऐतराज जताया था। नोट में कहा गया था कि यह साफ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की समानांतर बातचीत से भारत और भारत के वार्ताकार दल की स्थिति कमजोर हुई है। पीएमओ के अफसरों ने फ्रांस के साथ बातचीत में जो कहा है, वह रक्षा मंत्रालय के रुख से एकदम विपरीत है।
रक्षा सचिव ने रक्षा मंत्री से अपील की थी
इसी पर नोट पर तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए एक संदेश लिखा था। इसमें कहा गया था, ''रक्षा मंत्री कृपया इस मामले को देखें। हमारी पीएमओ को सलाह है कि उनके जो अधिकारी फ्रांस से वार्ता दल में शामिल नहीं हैं, उन्हें फ्रांस सरकार के अधिकारियों से समानांतर चर्चा नहीं करनी चाहिए। अगर पीएमओ मंत्रालय की बातचीत से सहमत नहीं है तो हम इसमें बदलाव कर सकते हैं। पीएमओ की समानांतर वार्ता से सौदे में मंत्रालय और भारतीय दल की स्थिति कमजोर होगी।''
पर्रिकर ने इसे ओवर रिएक्शन बताया था
तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा सचिव के नोट पर लिखा था- ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमओ और फ्रांस का राष्ट्रपति कार्यालय शिखर वार्ता के फैसलों के अमल पर नजर रख रहा है। रक्षा सचिव इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के साथ चर्चा कर सुलझा सकते हैं। अफसरों की आपत्ति ओवर रिएक्शन है।
फ्रांसीसी वार्ता दल के प्रमुख ने पीएमओ से फोन आने पर पत्र लिखा था
मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रक्षा मंत्रालय को पीएमओ के दखल की जानकारी फ्रांस के वार्ता दल के प्रमुख जनरल स्टीफन रेब के एक पत्र से मिली। इसमें पीएमओ के ज्वाइंट सेक्रेटरी और फ्रांस के रक्षा मंत्री के सलाहकार के बीच 20 नवंबर 2015 को फोन पर हुई बातचीत का जिक्र था।
इसके बाद रक्षा मंत्रालय और भारतीय वार्ता दल के प्रमुख एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा (एयरफोर्स के डिप्टी चीफ) की ओर से पीएमओ को पत्र लिखकर समानांतर वार्ता की जानकारी दी गई थी।
जवाब में पीएमओ के सेक्रेटरी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के कहने पर वहां के रक्षा मंत्री के सलाहकार ने उसने चर्चा की। हालांकि, सरकार ने 18 अक्टूबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल सौदे में बातचीत करने के लिए दल सात सदस्य थे। एयरफोर्स के डिप्टी चीफ इसके प्रमुख थे। इसमें पीएमओ की किसी तरह की भूमिका नहीं थी।
राहुल ने सैनिकों से कहा- प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर देखें
राहुल ने पहले ट्वीट किया, ''देश के वीर सैनिक, आप हमारे रक्षक हो। आप देश के लिए अपनी जान तक देने को हमेशा तैयार रहते हो। आप गर्व हो हमारे। मेरी प्रेस वार्ता जरूर देखें।'' प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि राफेल घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। अब सब कुछ साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल थे। वे घोटाले के गुनहगार हैं। उन्होंने ही अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए।
राहुल ने कहा- क्या मोदी को स्किजोफ्रेनिया है?
राहुल ने कहा- फ्रांस के राष्ट्रपति ने मोदी को चोर क्यों कहा था। और आज के नोट से यह साफ हो गया है कि रक्षा मंत्रालय उनको चोर बुला रहा है। वे चोर भी हैं। एक बार मुझे देखें और एक बार प्रधानमंत्री को देखें। आपको समझ आ जाएगा कि कौन घबराया हुआ है। वे कह रहे हैं कि उल्टा चोर चौकीदार को डांटें। क्या वे दोहरे व्यक्तित्व के शिकार हैं। क्या वे खुद को चोर और चौकीदार, दोनों मानते हैं। समझ में नहीं आता है कि कभी चौकीदार बन जाते हैं, कभी चोर। क्या उन्हें स्किजोफ्रेनिया है? पर्रिकर से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि उनसे डील को लेकर कोई बात नहीं हुई। यह सिर्फ सौजन्य भेंट थी।
Subscribe to:
Comments (Atom)
奥运延期的额外成本谁承担?IOC、日本开启扯皮大赛
中新网客户端北京4月22日电 香港自去年 色情性&肛交集合 爆发“反送中 色情性&肛交集合 ”抗议后政府首次有问责官员 色情性&肛交集合 人事调动,政制及内地事务局局 色情性&肛交集合 长聂德权被平调 色情性&肛交集合 接替罗智光出任 色情性&肛交集合 公务员事务局局长。 ...
-
消息人士透露说,中国已经暂时叫停 上海和伦敦的证交所互联互通计划。 这个被称为“沪伦通”的计 划旨在扩大中国公司投资者基础, 并让中国投资者能交易英国上市公司的股票。 色情性爱和安内尔性爱集合 消息人士 说,“沪伦通”计划受到政治因素影响而被中断 ,目前还不清楚何时能够恢复。...
-
В Киселевске на Кузбассе пьяный мужчина вломился в комнату супруги своего друга, который в это время спал после выпивки, и изнасиловал ее. ...
-
ارتفع الطلب على زيت أركان المغربي في مختلف أنحاء العالم؛ إذ له استخدامات متنوعة من بينها إعدا د الطعام ومستحضرات التجميل. ولا تزال هناك ...